तीन दिन में लैब पहुंच रहे सैंपल, 15 दिन में आ रही रिपोर्ट, कैसे मिलेगी दिल्ली को कोरोना से मुक्ति?
कोरोना वायरस की जांच - फोटो : PTI
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कोरोना वायरस को लेकर मंगलवार को 90 फीसदी दिल्ली ऑरेंज जोन में तब्दील हो सकती थी, लेकिन जांच रिपोर्ट समय पर नहीं मिलने के कारण ऐसा नहीं हो सका। मरीजों के सैंपल तीन-तीन दिन बाद लैब में जा रहे हैं और इनकी रिपोर्ट 15 दिन से भी लेट आ रही हैं। ऐसे में मरीज पॉजिटिव होगा भी तो वह ठीक हो गया होगा या फिर उससे कितने लोग संक्रमित हुए प्रशासन को इसके बारे में कोई जानकारी ही नहीं है? यही नहीं नॉन कोविड अस्पताल, दिल्ली पुलिस और सुरक्षा गार्डों के संक्रमित मिलने के चलते सरकार व प्रशासन भी चिंतित है।
मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन, उपराज्यपाल अनिल बैजल और सभी जिला आयुक्त के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मरीजों की जांच रिपोर्ट दो से तीन सप्ताह में मिलने का खुलासा हुआ। नोएडा स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल्स पर अतिरिक्त भार होने की वजह से रिपोर्ट में देरी हो रही है। उत्तरी दिल्ली के डीएम ने कहा कि यदि रिपोर्ट समय पर मिलती तो मंगलवार को हम ग्रीन जोन की ओर बढ़ रहे होते, लेकिन अभी भी रेड जोन में ही हैं। 15 दिन बाद जब रिपोर्ट आती है तो अचानक से मरीज बढ़ जाते हैं। मरीज को ही नहीं पता होता कि 15 दिन पहले वह किस-किस से मिला? जहांगीरपुरी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां देरी से रिपोर्ट मिली और अचानक 50 से 60 मरीज मिल गए। ऐसे में जिले को ऑरेंज या ग्रीन कैसे बनाएं?
ठीक ऐसा ही दक्षिणी पूर्वी की डीएम ने कहा कि तब्लीगी जमाती मिलने के बाद निजामुद्दीन इलाके में सर्वे किया गया, लेकिन उनकी रिपोर्ट अब तक नहीं मिली हैं। अगर यह रिपोर्ट पहले मिल जाती तो यह क्षेत्र ऑरेंज जोन में आ जाता। यही मुद्दा सेंट्रल दिल्ली प्रशासन ने भी उठाया तो दक्षिणी दिल्ली के उपायुक्त ने कहा कि उनके यहां करीब 14 कंटेनमेंट जोन हैं, जिनमें 600 सैंपल लिए जा चुके हैं, परंतु रिपोर्ट अब तक केवल 190 की मिली हैं। पश्चिमी दिल्ली की डीएम ने बताया कि उनके यहां 13 कंटेनमेंट जोन हैं, जिसमें एक सबसे बड़ा है। यहां 500 लोगों के सैंपल लिए जा चुके हैं, लेकिन रिपोर्ट 130 की ही मिली हैं।

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