मजदूर दिवस आज / पहली बार 6 लाख मजदूराें के हाथ काम नहीं, दो वक्त की रोटी के लिए फैलाना पड़ रहा है हाथ
चांदपोल छोटी भील बस्ती निवासी ममाराम दिहाड़ी मजदूर है। दिनभर मजदूरी कर शाम को लौटता तो 5 सदस्यीय परिवार के लिए राशन भी लाता था। अब पत्नी व तीन बच्चों का पेट भरना चुनौती है।
*कर्फ्यूग्रस्त नागौरी गेट के किला रोड निवासी फिरोज टूरिस्ट गाड़ी चलाते हैं, लॉकडाउन से काम और पगार दाेनाें बंद है, बचत भी खत्म हो गई है
*बिहार के मोतिहारी के नितेश कुमार परिवार के साथ रहते हैं, बाेले- कभी नहीं सोचा था कि फैक्ट्री यूं बंद हो जाएगी, काम नहीं तो यहां रहकर क्या करें?
चांदपोल छोटी भील बस्ती निवासी ममाराम दिहाड़ी मजदूर है। दिनभर मजदूरी कर शाम को लौटता तो 5 सदस्यीय परिवार के लिए राशन भी लाता था। अब पत्नी व तीन बच्चों का पेट भरना चुनौती है।
*कर्फ्यूग्रस्त नागौरी गेट के किला रोड निवासी फिरोज टूरिस्ट गाड़ी चलाते हैं, लॉकडाउन से काम और पगार दाेनाें बंद है, बचत भी खत्म हो गई है
*बिहार के मोतिहारी के नितेश कुमार परिवार के साथ रहते हैं, बाेले- कभी नहीं सोचा था कि फैक्ट्री यूं बंद हो जाएगी, काम नहीं तो यहां रहकर क्या करें?
जोधपुर. आज 1 मई है। मजदूर दिवस। हर साल 1 मई को श्रमिक संगठन मजदूरों के हित, उनके हक के लिए मिली सफलता का जश्न मनाते हैं। लेकिन इस बार वे इस खास दिन को लाल सलाम नहीं कर सकेंगे। गत तीस दिन से यह समय इनके लिए रोजगार के संकट के रूप में खड़ा है। लॉकडाउन की बढ़ रही सीमा इन्हें परिवार का पेट नहीं पालने दे रही। जिले में असंगठित क्षेत्र से जुड़े 6 लाख लोग श्रम कर रोजी-रोटी कमा रहे थे। वे अब मजदूर दिवस के दिन दो वक्त की रोटी के लिए हाथ फैला रहे हैं।
अन्य राज्यों में रोजगार करने वाले परेशान होकर जोधपुर लौटना चाह रहे हैं। यहां फंसे दूसरे राज्यों के लोग लौटने के लिए पैदल ही निकल पड़े। इस आस में कि वहां परिवार के साथ रोटी तो मिल ही जाएगी। जिले में खेती व किसानी से जुड़े लोगों को छोड़ दें तो जनगणना 2011 के मुताबिक 5.22 लाख श्रमिक काम करते हैं। करीब 32 हजार लोग घर-परिवारों में काम करते हैं। कुछ इंडस्ट्री खुली हैं लेकिन इसका फायदा नहीं मिल रहा। एक माह लॉकडाउन झेल चुके इन लोगों के पास अब न रोजगार है और न पैसा। लॉकडाउन खुलने का भविष्य नजर नहीं आ रहा। सरकार की ओर से राशन बांटने की व्यवस्था हांफ चुकी है। सामाजिक संस्थाएं व संगठन व आम लोग भोजन-राशन बांट रहे हैं, इसे पाने काे श्रमिकों के परिवार सड़कों व गलियों में बैठे रहते हैं।

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