पुत्र प्रेम में अंधे हुए धृतराष्ट्र, हस्तिनापुर का किया विभाजन
पूरे देश में 3 मई तक लॉकडाउन लागू है। ऐसे में दूरदर्शन पर दोबारा टेलिकास्ट की जा रही ‘महाभारत’ को दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं। शो में लगातार आ रहे ट्विस्ट और टर्न्स कहानी को और भी दिलचस्प बना रहे हैं। दूरदर्शन की भी टीआरपी में इस सीरियल की वजह से उछाल आया है। अभी तक आपने देखा कि द्रौपदी का स्वयंवर हो चुका है और विदाई के लिए उनकी सहेलियां उन्हें तैयार कर रही हैं। पांचाल नरेश द्रौपदी की विदाई से काफी मायूस नजर आ रहे हैं। इसके बाद द्रौपदी डोली में बैठ जाती हैं। पांचाल नरेश, उन्हें हमेशा खुश रहने का आशीर्वाद देते हैं।
12:59- धृतराष्ट्र जब युधिष्ठर को बताते हैं कि हस्तिनापुर का विभाजन होना जरूरी है तो वह उन्हें ऐसा करने से मना करते हैं। लेकिन, धृतराष्ट्र नहीं मानते और युधिष्ठर को उनके आगे झुकना पड़ता है। पांडव मान जाते हैं। नेत्रहीन धृतराष्ट्र को पुत्र प्रेम में कुछ नहीं दिखता और वह हस्तिनापुर का विभाजन कर देते हैं। जिसके बाद वह काफी दुखी होते हैं।
जाए12:56- धृतराष्ट्र के सबसे बड़े पुत्र उनके पास आते हैं और वह उनसे अपनी परेशानी बताते हैं। धृतराष्ट्र कहते हैं कि यह सिंहासन मेरा नहीं। मैं केवल पांडवों का प्रतिनिधि हूं। वह बताते हैं कि यह निर्णय लिया गया है कि हस्तिनापुर का विभाजन किया।
12:51- भीष्म हस्तिनापुर के विभाजन का प्रस्ताव रखते हैं और दुखी हो जाते हैं। भीष्म, धृतराष्ट्र से कहते हैं कि हस्तिनापुर राज्य वह दोनों युवराजों में आधा-आधा बांट दें। इसी में भलाई है।
12:47- विचार हो रहा है कि हस्तिनापुर दो युवराजों में से किसे पद पर बिठाए और किसे पद से हटाए। इसके बाद भीष्म पर यह निर्णय लेना छोड़ दिया जाता है कि वह किसे हस्तिनापुर के राज सिंहासन सौंपेंगे।
12:44- महाराज धृतराष्ट्र का स्वागत हो रहा है। और उन्हें सिंहासन पर बिठाया जा रहा है। उन्होंने एक सभा बुलाई है, जिसमें युधिष्ठर को युवराज बनाने की मांग होती है।
12:37- कृष्ण भी पांडवों के साथ मेहमान बनकर हस्तिनापुर में आते हैं। कुंती अपनी जेठानी गांधारी संग मिलकर उनका स्वागत करती हैं। और भोजन करने के लिए कहती हैं।
12:32- पांडवों के आने से हस्तिनापुर में जान आ गई है- गांधारी कहती हैं। साथ ही वह द्रौपदी को आशीर्वाद देती हैं कि उनकी मांग हमेशा भरी रहे और गोद बच्चों से भरे। इसके बाद द्रौपदी धृतराष्ट्र से आशीर्वाद लेती हैं।
12:26- धन्य हस्तिनापुर हुआ... गाना चल रहा है, जिसमें द्रौपदी का स्वागत किया जा रहा है। पांडव भी हैं साथ।
12:24- द्रौपदी की मुलाकात देवर दुशासन से होती है और वह मजाक में अपनी भाभी से कहते हैं कि उन्हें वह ठीक से देख लें।
12:21- द्रौपदी, हस्तिनापुर में पांडवों संग आती हैं। गांव वाले द्रौपदी का स्वागत करते हैं। महाराज युधिष्ठर की और महारानी कुंती की जय-जयकार हो रही है।द्रौपदी, भीष्म का आशीर्वाद लेती हैं। और भीष्म उनका घर में स्वागत करते हैं।
12:16- भीष्म पितामह, देर रात कर्ण और पुत्र वत्स से मिलते हैं। कर्ण, भीष्म पितामह से कहते हैं कि मेरा ह्रदय तुम्हारे राज्य का वह भाग है जिसे तुम कभी हार नहीं सकते। इतने में भीष्म कहते हैं कि समस्या उनके परिवार की है और वह उन्हें अकेला छोड़ दें। कर्ण वहां से चले जाते हैं।
12:02- भीष्म परेशान होते हैं और सोच में पड़ जाते हैं कि हस्तिनापुर का भविष्य क्या होने वाला है। ऐसे में वह अपनी इस परेशानी को मां गंगा के पास लेकर जाते हैं और उनसे प्रकट होने का आग्रह करते हैं। मां गंगा प्रकट होती हैं और कहती हैं कि वह खुद इस समस्या का हल ढू़ंढे।

Comments
Post a Comment