कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के एक नस दबाते ही तिलमिला उठी केंद्र सरकार
सोनिया गांधी (फाइल फोटो) - फोटो
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी शनिवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ मंत्रणा के बाद गरीब, मजदूर का रेलवे और बस का किराया पार्टी की तरफ से देने का निर्णय लिया। सकारात्मक पहल के साथ सोनिया गांधी ने परोक्ष रूप से एक नस क्या दबाई, केन्द्र पूरी केन्द्र सरकार तिलमिला उठी। सोनिया गांधी की पहल पर शनिवार को ही कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार एक करोड़ रु. का चेक मुख्य सचिव को दे आए। रविवार सुबह पार्टी के संगठन महासचिवों ने सभी महासचिवों, प्रदेश अध्यक्षों से बात की और मुख्य सचिव के पास गरीबों, मजदूरों का किराया देने का पत्र देने, चेक देने को कहा। सोनिया, राहुल, प्रियंका, अहमद पटेल, रणदीप सुरजेवाला के ट्वीट आते गए और सोशल मीडिया पर केन्द्र सरकार पर दबाव बढ़ता चला गया।
सुब्रामण्यम स्वामी......आनन-फानन में केन्द्र सरकार ने बदला निर्णय
कांग्रेस पार्टी के इस निर्णय की गंभीरता भाजपा के राज्यसभा सुब्रामण्यम स्वामी को समझते देर नहीं लगी। उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री पीयुष गोयल से बात की। पीयुष गोयल से मंत्रणा के बाद स्वामी ने जानकारी सार्वजनिक की कि गरीब, मजदूरों के किराए का 85 प्रतिशत हिस्सा केन्द्र सरकार, 15 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी। भाजपा के तेज तर्रार प्रवक्ता सांबित पात्रा भी सक्रिय हुए। भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने तत्काल संज्ञान में लिया। सूत्र बताते हैं कि फोन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के पास भी पहुंचा। पार्टी के नेताओं ने मंत्रणा की। ऐसा माना जा रहा है कि अमित भाई (केन्द्रीय मंत्री) ने प्रधानमंत्री और रेल मंत्री से भी चर्चा की। इसके बाद सभी भाजपा राज्य सरकारों ने निर्णय लेना शुरू कर दिया। 04 मई को म.प्र. के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी आदेश जारी किया कि राज्य सरकार 15 प्रतिशत किराए का वहन करेगी। हालांकि कांग्रेस शासित एक राज्य के मुख्यमंत्री ने दावे के साथ कहा कि पहले तो यह किराया गरीब, मजदूरों को ही भरने की जानकारी थी। खैर, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के इस निर्णय के बाद छत्तीसगढ़, पंजाब, राजस्थान की सरकारों ने भी गरीब, मजदूरों के किराए का खर्च वहन करने की घोषणा कर दी।
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन का बयान महत्वपूर्ण है
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव ने गरीब, मजदूरों से किराया वसूलने के सवाल पर शनिवार को ही एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र को बताया था कि वह(रेलवे) मुफ्त यात्रा की आदत नहीं डालना चाहता। समझा जा रहा है कि विनोद कुमार यादव का यह निर्णय केवल उनके बस की बात नहीं है। इसमें रेलमंत्री पीयुष गोयल और उच्च स्तर पर मिली अनुमति जरूर शामिल रही होगी। रविवार को सुबह से रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और रेल मंत्री पीयुष गोयल से संपर्क की हर कोशिश बेकार गई। यहां तक कि केन्द्र सरकार ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी को नहीं घेरा।

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