Labour Law: UP, MP व गुजरात में बदला कानून, 10 बिन्दुओं में जानें अहम बदलाव और आप पर असर
उद्योगों को रफ्तार देने को UP MP व गुजरात में 3 साल तक श्रम कानून समाप्त कर दिए गए हैं। माना जा रहा है कि जल्द कई और राज्य उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए ऐसी घोषणाएं कर सकते हैं।
नई दिल्ली [ऑनलाइन डेस्क]। कोरोना महामारी से निपटने के लिए दुनिया भर में चल रहे लॉकडाउन से भारत समेत विश्वभर की अर्थव्यवस्था डगमगा गई है। इससे निपटने के लिए सभी देश अपने-अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों संग बैठक कर उद्योग-धंधों को दोबारा एहतियात के साथ शुरू कराने को लेकर चर्चा की थी। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्रियों से कहा था कि भारत के पास ये अच्छा मौका है कि वह चीन से पलायन करने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपनी तरफ आकर्षित करे। प्रधानमंत्री के इस आव्हान के बाद मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश व गुजरात ने अपने लेबर कानूनों में बड़े बदलावों की घोषणा कर दी है।
तीनों राज्यों ने तीन वर्ष के लिए उद्योगों को न केवल लेबर कानून से छूट दी है, बल्कि उनके रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसिंग प्रक्रिया को भी ऑनलाइन व सरल कर दिया है। नए उद्योगों को अभी लेबर कानून की विभिन्न धाराओं के तहत पंजीकरण कराने और लाइसेंस प्राप्त करने में 30 दिन का वक्त लगता था, अब वह प्रक्रिया 1 दिन में पूरी होगी। इसके साथ ही उद्योगों को उत्पादन बढ़ाने के लिए शिफ्ट में परिवर्तन करने, श्रमिक यूनियनों को मान्यता देने जैसी कई छूट दी गई हैं। राज्य सरकारों की इन घोषणाओं से एक तरफ उद्योग जगत राहत महसूस कर रहा है तो वहीं श्रमिक संगठन आशंका जता रहे हैं कि इससे कर्मचारियों पर काम का दबाव और बढ़ेगा। आइये जानते हैं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश व गुजरात द्वारा लेबर कानून में किए गए अहम बदलावों और श्रमिकों पर पड़ने वाले उसके असर के बारे में।
क्यों बदले गए लेबर कानून
जैसा की प्रधानमंत्री ने चीन से पलायन करने वाली कंपनियों को आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्रियों का आव्हान किया था, उसी को आधार बनाते हुए राज्य सरकारों ने लेबर कानूनों में बदलाव किया है। इसके पीछे सरकारों का तर्क है कि इन बदलावों से उद्योगों को राहत मिलेगी। साथ ही प्रदेश में नए उद्योगों को लाना आसान होगा। प्रदेश में नए उद्योग आएंगे तो इससे लोगों के लिए रोजगार के नए दरवाजे खुलेंगे। विशेष तौर पर अन्य राज्यों से पलायन कर अपने घरों को वापस लौटने वाले श्रमिकों को उनके गृह जनपद में रोजगार की संभावना बढ़ेगी।
उत्तर प्रदेश के लेबर कानून में हुए प्रमुख बदलाव
मध्य प्रदेश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 7 मई को लेबर कानूनों में बदलाव की घोषणा की है। यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अगले 1000 दिन के लिए लेबर कानूनों में कई अहम बदलाव किये हैं। यूपी सरकार ने इसके लिए 'उत्तर प्रदेश टेंपरेरी एग्जेम्प्शन फ्रॉम सर्टेन लेबर लॉज ऑर्डिनेंस 2020' को मंजूरी प्रदान कर दी है। आइये जानतें हैं कानून में किए गए प्रमुख बदलावों के बारे में...
उद्योगों को रफ्तार देने को UP MP व गुजरात में 3 साल तक श्रम कानून समाप्त कर दिए गए हैं। माना जा रहा है कि जल्द कई और राज्य उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए ऐसी घोषणाएं कर सकते हैं।
नई दिल्ली [ऑनलाइन डेस्क]। कोरोना महामारी से निपटने के लिए दुनिया भर में चल रहे लॉकडाउन से भारत समेत विश्वभर की अर्थव्यवस्था डगमगा गई है। इससे निपटने के लिए सभी देश अपने-अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों संग बैठक कर उद्योग-धंधों को दोबारा एहतियात के साथ शुरू कराने को लेकर चर्चा की थी। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्रियों से कहा था कि भारत के पास ये अच्छा मौका है कि वह चीन से पलायन करने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपनी तरफ आकर्षित करे। प्रधानमंत्री के इस आव्हान के बाद मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश व गुजरात ने अपने लेबर कानूनों में बड़े बदलावों की घोषणा कर दी है।
तीनों राज्यों ने तीन वर्ष के लिए उद्योगों को न केवल लेबर कानून से छूट दी है, बल्कि उनके रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसिंग प्रक्रिया को भी ऑनलाइन व सरल कर दिया है। नए उद्योगों को अभी लेबर कानून की विभिन्न धाराओं के तहत पंजीकरण कराने और लाइसेंस प्राप्त करने में 30 दिन का वक्त लगता था, अब वह प्रक्रिया 1 दिन में पूरी होगी। इसके साथ ही उद्योगों को उत्पादन बढ़ाने के लिए शिफ्ट में परिवर्तन करने, श्रमिक यूनियनों को मान्यता देने जैसी कई छूट दी गई हैं। राज्य सरकारों की इन घोषणाओं से एक तरफ उद्योग जगत राहत महसूस कर रहा है तो वहीं श्रमिक संगठन आशंका जता रहे हैं कि इससे कर्मचारियों पर काम का दबाव और बढ़ेगा। आइये जानते हैं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश व गुजरात द्वारा लेबर कानून में किए गए अहम बदलावों और श्रमिकों पर पड़ने वाले उसके असर के बारे में।
क्यों बदले गए लेबर कानून
जैसा की प्रधानमंत्री ने चीन से पलायन करने वाली कंपनियों को आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्रियों का आव्हान किया था, उसी को आधार बनाते हुए राज्य सरकारों ने लेबर कानूनों में बदलाव किया है। इसके पीछे सरकारों का तर्क है कि इन बदलावों से उद्योगों को राहत मिलेगी। साथ ही प्रदेश में नए उद्योगों को लाना आसान होगा। प्रदेश में नए उद्योग आएंगे तो इससे लोगों के लिए रोजगार के नए दरवाजे खुलेंगे। विशेष तौर पर अन्य राज्यों से पलायन कर अपने घरों को वापस लौटने वाले श्रमिकों को उनके गृह जनपद में रोजगार की संभावना बढ़ेगी।
उत्तर प्रदेश के लेबर कानून में हुए प्रमुख बदलाव
मध्य प्रदेश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 7 मई को लेबर कानूनों में बदलाव की घोषणा की है। यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अगले 1000 दिन के लिए लेबर कानूनों में कई अहम बदलाव किये हैं। यूपी सरकार ने इसके लिए 'उत्तर प्रदेश टेंपरेरी एग्जेम्प्शन फ्रॉम सर्टेन लेबर लॉज ऑर्डिनेंस 2020' को मंजूरी प्रदान कर दी है। आइये जानतें हैं कानून में किए गए प्रमुख बदलावों के बारे में...

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