गांवों की ओर चले उद्योग जगत: उदय कोटक बोले- इससे शहरों पर घटेगा बोझ, गांवों की इकोनॉमी मबजूत होगी
कोटक ने कहा कि कोरोना वायरस से जो स्थिति बनी है उसमें अभी सब कुछ अस्पष्ट है। ऐसे में इस वर्ष हम ग्रोथ रेट का कोई लक्ष्य नहीं रख रहे हैं।
नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। लॉकडाउन ने जिस तरह से प्रवासी मजदूरों को उनके गांव व घर की तरफ लौटने को विवश किया है, उससे देश के उद्योग जगत पर भी बुरा असर पड़ा है। वैसे इस रिवर्स माइग्रेशन यानी शहरों से निकलकर गांवों की ओर जाने से कल-कारखानों में तात्कालिक तौर पर श्रमिकों की कमी हो सकती है। लेकिन उद्योग जगत मानता है कि इससे मौजूदा अर्थनीति में भी बदलाव का एक अवसर मिला है। देश के सबसे प्रमुख उद्योग चैंबर सीआइआइ के नए प्रेसिडेंट उदय कोटक ने सरकार से आह्वान किया है कि वह उद्योग जगत के साथ मिलकर एक नीति बनाए।यह नीति कल-कारखानों व दूसरी आर्थिक गतिविधियों को कुछ बड़े शहरों तक केंद्रित रखने की जगह ग्रामीण इलाकों तक जाने में प्रोत्साहित करे। इससे ना सिर्फ शहरों पर बोझ कम कर उन्हें ज्यादा बेहतर बनाया जा सकता है, बल्कि भारतीय इकोनॉमी के ढांचे को और सुदृढ़ व व्यापक बनाया जा सकता है। सीआइआइ ने अपने रोडमैप में भी सामाजिक ढांचे पर ज्यादा जोर दिया है और यह संकेत दिया है कि वह बड़े सामाजिक-आर्थिक बदलाव के लिए कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार

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